छत्तीसगढ़ी सुआ गीत
डॉ. विवेक तिवारी- छत्तीसगढ़_का_सांस्कृतिक_वैभव -1 #सुआ_गीत छत्तीसगढ़ के लोकगीतों की वैभवशाली संस्कृति का हिस्सा है सुआ गीत। यह छत्तीसगढ़ प्रदेश की गोंड जाति के प्रमुख नृत्य-गीत है लेकिन अन्य जाति के महिलाएं भी इसमें शामिल नृत्य करती हैं। जिसे सामूहिक रुप से चलाया जाता है। यह मामूली महिलाओं के मनोभावों सुख-दुख आदि की अभिव्यक्ति का माध्यम होता है। कार्तिक मास में दीपावली के समय मनाये जाने वाले 'गौरा उत्सव' जो कि गोंड जाति का एक प्रमुख पर्व है गौरा माता अर्थात् पार्वती तथा गौरा उत्सव शिव-पार्वती के विवाह का उत्सव है। गौरा पर्व से शुरू होता है अगहन मास तक चलता है। इस दिन के समय किया जाने वाला नृत्य है और इसमें केवल महिलाएं ही सहभागी होती हैं इसमें पुरुषों का सहयोग नहीं होता है। माता पार्वती की तपस्या को सोचकर अपने जीवन में चरितार्थ करने के लिए वे 'गौरा' की स्थापना कर शिव जी को सुआ (शुक/तोता) के माध्यम से अपने मनोव्यथा का संदेश भेजते हैं। शीतकाल में जब ये महिला...